नारी है माना तू
पर बलहीन नहीं बलहीन नहीं
क्यों पैदा होते ही तेरे छा जाते गम
क्यों पुत्र सी तू अनमोल नहीं
हाँ माना नारी है तू
शक्ति का अवतार है तू
इस जग की जननी हार है तू
क्यों तेरा ही कोई मोल नहीं
हाँ नारी है तू
क्यों तुच्छ ही समझी जाती तू
क्यों तेरे आदर के संस्कार नहीं
हाँ माना नारी है तू
बच्चो का पालन करती तू
कितनी राते उनके लिए जगती तू
फिर भी तेरा उन पर अधिकार नहीं
हाँ नारी है तू
मकान को घर है बनाती तू
हर कोने को सजती है तू
पर क्यों तेरा ही उस पर अधिकार नहीं
हाँ नारी है तू
उठ जाग ! बहुत देर हुई अब
पढ़ लिख कर नई राह बना
अपने सपनों को पूरा कर
और आत्मनिर्भर बन जा
पर बलहीन नहीं बलहीन नहीं
क्यों पैदा होते ही तेरे छा जाते गम
क्यों पुत्र सी तू अनमोल नहीं
हाँ माना नारी है तू
शक्ति का अवतार है तू
इस जग की जननी हार है तू
क्यों तेरा ही कोई मोल नहीं
हाँ नारी है तू
क्यों तुच्छ ही समझी जाती तू
क्यों तेरे आदर के संस्कार नहीं
हाँ माना नारी है तू
बच्चो का पालन करती तू
कितनी राते उनके लिए जगती तू
फिर भी तेरा उन पर अधिकार नहीं
हाँ नारी है तू
मकान को घर है बनाती तू
हर कोने को सजती है तू
पर क्यों तेरा ही उस पर अधिकार नहीं
हाँ नारी है तू
उठ जाग ! बहुत देर हुई अब
पढ़ लिख कर नई राह बना
अपने सपनों को पूरा कर
और आत्मनिर्भर बन जा
No comments:
Post a Comment
Please Share Your Thoughts Here