Tuesday, November 1, 2016

नारी है माना तू

नारी है माना तू
पर बलहीन नहीं बलहीन नहीं
क्यों पैदा होते ही तेरे छा जाते गम
क्यों पुत्र सी तू अनमोल नहीं

हाँ माना नारी है तू

शक्ति का अवतार है तू
इस जग की जननी हार है तू
क्यों तेरा ही कोई मोल नहीं

हाँ नारी है तू
क्यों तुच्छ ही समझी जाती तू
क्यों तेरे आदर के संस्कार नहीं


हाँ माना नारी है तू
बच्चो का पालन करती तू
कितनी राते उनके लिए जगती तू
फिर भी तेरा उन पर अधिकार नहीं

हाँ नारी है तू
 मकान को घर है बनाती तू
 हर कोने को सजती है तू
पर क्यों तेरा ही उस पर अधिकार नहीं

हाँ  नारी है तू
उठ जाग ! बहुत देर हुई अब
 पढ़ लिख कर नई राह बना
अपने सपनों  को पूरा कर
और आत्मनिर्भर बन जा 

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