Monday, August 17, 2015

दर्द

दर्द
पेड़ से पूछो
फल देता है पर
क्या पाता है ?
कसाई बन काट
देते है उसको
यह दर्द भी पी जाता है ।

दर्द
माँ से पूछो
जन्म देती पालन करती
एक दिन छोड़ दी जाती
बेटा भूल जाता उसको
यह आँसू भी पी जाती है ।

दर्द
बेटी से पूछो
पराई हर जगह कहलाती
कभी ताने सुनती सबके
फिर कहीं जलाई जाती
यह आँसू भी पी जाती है ।

दर्द
मज़दूर से पूछो
दिन भर बोझ ढोता है
खाता नहीं बस रोता है
घरवाले भूखे रह जाते है
इतने भी पैसे नहीं कमा पाता है
यह आँसू भी पीता जा है ।

दर्द बच्चे
 से पूछो
अनाथ जो कहलाता है
माँ-बाप का प्यार ना मिला
अपशब्द सबसे पाता है
यह आँसू भी पी जाता है ।

Saturday, August 15, 2015

पाँचाली मत बन

पाँचाली मत बन
 रानी झाँसी बन तू ।
यहाँ कृष्ण नहीं कोई
हर जन कंस और रावण है ।

हर चौराहे पर बैठे हैं दानव
जिनके मन में दया ना आई है ।
देह में लालच भरा है इनके
हर कोई दुर्योधन का भाई है ।

पाँचाली मत बन ________।

बाहर की तो बात ही छोड़ो
घर में भी ना सुरक्षा पाई है ।
क्या भाई क्या बाप क्या ताऊ
हर किसी ने घात लगाई है ।

पाँचाली मत बन ________।

तू ही अपनी सखा कृष्ण है
तुझे ही अपनी लाज बचानी है ।
तलवान उठा इंसाफ की तुने
हर कंस की सांस मिटानी है ।

पाँचाली मत बन ________।

काली बन जा, दुर्गा बन जा
सती नहीं अब होना है ।

उठा ले खङग तू हाथ में अपने
अब लज्जित नहीं होना है ।

पाँचाली मत बन ________ ।

जान ले अधिकार तू अपना
मत सह तू किसी के ज़ुल्मों को
अपने हाथों लिख तकदीर अपनी
रौंद दे हर रावण और कंस को ।
पाँचाली मत बन _______ ।

Tuesday, July 14, 2015

कुछ कहना है तुमको

कुछ कहना है तुमको जिदंगी ,
क्या सुन पाओगी तुम ?

बड़ी ही निराली हो तुम
कितने ही रंग है तुम्हारे
कभी धूप हो कभी छाँव हो ,
कभी सुबह हो कभी साँझ हो ।

कुछ कहना है तुमको जिदंगी ,
क्या सुन पाओगी तुम ?

कभी खुशियाँ भर के लाती हो ,
फिर गम भी संग दे जाती हो ।
कभी नूर तो कभी बेनूर हो ,
इतनी जल्दी क्यों बदल जाती हो तुम ?

कुछ कहना है तुमको जिदंगी ,
क्या सुन पाओगी तुम ?

मेरी ज़रा भी समझ ना आई तुम ,
हर पल नया गम लाई तुम ,
समझ ही नहीं पाई तुमको ।
प्यार करूँ या लड़ूँ मैं तुमसे ?

कुछ कहना है तुमको जिदंगी ,
क्या सुन पाओगी तुम ?

मेरा दर्द

दर्द मेरा जब ,
मेरे जीने की वजह बन गया ,
यही दिल की राहत और
यही मेरा मुकद्दर बन गया।

खुशी तो धोखा थी ,
आई और चली गई ।
कुछ सपने दिखाकर मुझको ,
जाने कब रुस्वा हो गई ।
गम ही रहा मेरे पास ,
जो हमदर्द मेरा बन गया ।

दर्द मेरा जब ,
मेरे जीने की वजह बन गया ,
यही दिल की राहत और
यही मेरा मुकद्दर बन गया।

अच्छा हुआ कोई आस नहीं ,
कोई नया विश्वास नहीं ,
कोई आएगा लेकर खुशियाँ यहाँ
उस पल का भी तो इंज़ार कहाँ ।
यह तन्हाई ही मेरा जीवन है ।
यही अब मेरा मुकद्दर बन गया ।

दर्द मेरा जब ,
मेरे जीने की वजह बन गया ,
यही दिल की राहत और
यही मेरा मुकद्दर बन गया।

Sunday, July 5, 2015

थकना मत पथिक !

आशा और निराशा
ही जीवन का आधार,
पर तु थकना मत,
हारना मत , पथिक !
यही है जीवन का सार

हमेशा जीत नहीं है मिलती
काँटें पथ पर होते ही हैं
नहीं कोई सरल राह यहाँ
ठोकर तो लगती ही है

पर तु थकना मत पथिक !

हिमालय सा कर ले तु
अपने दबे इरादों को
मत डर इन हवाओं से
लड़ ले हर हालातों से तु

पर तु थकना मत पथिक !

मिलेगी जीत तुझे गर
तु हिम्मत को नहीं छोड़ेगा
हर चुनौती को तु बढ़ कर
घुटनों पर लाकर तोड़ेगा

पर तु थकना मत पथिक !

Monday, June 29, 2015

एक ख्वाब

एक सुंदर सा ख्वाब हो तुम,
तभी तो पाना मुश्किल तुमको।

काश ! तुम रब होते,
पूजा करके पा जाती तुमको।
एक सुन्दर सा मन्दिर बनाकर,
देवता वहाँ बनाती तुमको ,पर

तुम तो एक ख्वाब हो ।

फिर सोचा ,एक मोती होते तुम,
सुंदर गहना बनाती मैं,
हर पल अपने साथ ही रखती ,
और सुंदर बन जाती मैं ,

पर तुम तो एक ख्वाब हो।

बस मेरी आत्मा का अहसास हो ,
एक मीठी सी आस हो ,
जो भी हो ,कोई छीन नहीं सकता तुमको मुझसे ,
क्योंकि तुम ही मेरा संसार हो ।

कैसे बदल जाते हैं लोग

लोग !
कैसे बदल जाते हैं,
काली छाई घटा की तरह,
सुर्ख धूप और छाया की तरह,
सूनी डगर और भूचाल की तरह,
कैसे! बदल जाते हैं , लोग |

कभी अपनापन दिखाते हैं,
फिर खुद ही भूल जाते हैं,
हर पल दिल की धड़कन बनकर,
ढ़ेरों सारी खुशियाँ देकर,
जाने कब गम भी दे जाते हैं,
लोग!
कैसे बदल जाते हैं |

 शुक्र है रब तू नहीं बदलता,
हर पल संग है,मेरे रहता,
सुना है, तू ही सबमें समाया है,
फिर, क्यों इतनी खुद्गर्ज़ी,
दिखा जाते हैं लोग,
कैसे , और क्यों,
बदल जाते हैं लोग |

Maa ka Aanchal

Maa ka Aanchal Kitna pyara
Khud aansu se bheega rehta
Sab kuch har pal
Sehta rehta
Phir bhi mere aansu ponche
Ye to hai Sab jag se nyara
Mere har dukh har leta hai
Maa ke aansu ye hai chupata
WO bheega sa Aanchal
Mere liye Jag se lad jata
Maa ka Aanchal kitna pyara
Jab haar jati hu Sab se
Ye hi mujhko rah dikhata
Har pal ladhne Ki shakti deta
Jab bhi main kabhi gir jati
Aa ke mujko pal main uthata
Maa ka Aanchal kitna pyara
Rab ke roop sa lagta mujhko
Har pal thandi deta chaya
Kaash main aaj bhi chup jati isme
Meethi neend to aati mujko
Jo kab se kho gayi hai kahi
Ha bus yhi hai mera shara
Maa ka Aanchal
                         - Neelam

Kaun ho tum?

Kaun ho tum?
Bin puche dil ko chu gye,
Bin btaye kha se aaye,
Subh ka ujiaara ban kr,
Raat ka sunder Tara ban kr,
Maine pucha ji, aray
Kaun ho tum?
Bin saavan hi phool khilaye,
Dil ka aangan yu mehkaye,
Bhool gayi mein Sab dukh apne,
Itni khushiyan kahan se laye,
Kaun ho tum?
Bade apne se lagte ho tum,
Tum bin jiya kahan ab jaye,
Khuda ke noor se lagte ho tum,
Kyun na tumse ,tumko manga jaaye,
Kya khoob ahsas ho tum,
Zindagi mein mehak si laye
Maine pucha,
Kaun ho tum?
                       -Neelam