Sunday, November 6, 2016

नेता जी हमारे

एक दिन नेता जी से पूछा मैंने
और कितनी तोंद बढ़ाओगे
देश तो सारा खा ही चुके हो
अब और क्या - क्या खाओगे

नेता जी मंद - मंद मुस्काये , बोले
अभी तो कुछ ख़ास नहीं किया है
१०० पुश्तों के लिए कमाना है

अरे १० पुश्तों का ही जुगाड़ हुआ है अब तक
विदेशों में भी पैसा जमा कराना है
अभी तो सरकारी ज़मीन बेची है
सरकारी आसमां पे भी कब्ज़ा जमाना है

पानी पर ही टैक्स लगाया है अभी तो
अरे सांस पर भी तो लगाना है
देश के किसान ही मरे हैं अब तक
हर गरीब को वहीं तक पहुँचाना है

हर चीज़ बेचनी है देश की  लिए
तभी चैन मुझको आना है
विदेशों से कर्ज़े ले लेकर
अपनी प्राइवेट प्रॉपर्टी को बढ़ाना है

मेरी ही केवल तोंद बढ़ी है अब तक
मेरे हर रिश्तेदार की तोंद को बढ़ाना है
सरकारी खज़ाना खाली करके सारा
बस फिर चिंतामुक्त मुझे हो जाना है

फिर राम नाम में मन लगाना है
फिर राम नाम में मन लगाना है 

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