Monday, October 31, 2016

मैं हूँ वोट

मैं हूँ वोट
देखो मेरा कमाल
छोटी सी हूँ मैं
पर करती बड़े धमाल


१८ साल साल का जब कोई हो जाता
मेरा हक़ उसको मिल जाता
बालिक होने की ख़ुशी में
वोटर कार्ड बनवाने जाता
फोटो चाहे भद्दी ही आए
फिर भी उसको बड़ी ही भये

मैं हूँ वोट

नेताओ को मैं लड़वाऊं 
झूठे वादे उनसे करवाऊँ 
मेरे लालच में तो नेता 
भिखारी के भी पैर दबाएँ 
चुनाव के दिनों में तो 
मेरे बस ठाठ बन जाएँ 

मेरी कीमत हर कोई लगाए 
कोई १०० रु में मुझे बेचे 
कोई मदिरा बोतल में दे जाये 
लाखोँ की गठरी में कोई तोले 
अलग - अलग लगाते मोल मेरा 
बस यही मुझे समझ ना आए 

मैं हूँ वोट

क्यों नेता करोड़ों रुपए लुटाएँ
क्या है बोलो कीमत 
कोई तो मुझे समझाए
क्या मैं अनमोल हूँ 
या हूँ बस एक कागज़ का टुकड़ा 
लोकतंत्र के चंगुल में फँसी 
मेरी बेबसी कोई ना समझ पाए 

क्या रहूंगी मैं भ्रष्टाचार की चेरी सदा
क्यों मेरा सच्चा घर - बार नहीं
हमेशा बिकती रहूंगी मैं
 क्या मेरा कोई मान सम्मान नहीं
मैं क्या चाहूँ मैं क्या सोचूँ
इससे  सरोकार नहीं

मैं हूँ वोट

क्यों बनाया गया मुझको 
बाजार में बिकने के लिए
कब  जागोगे तुम मतदाता 
कब मेरा मोल पाओगे 
मैं तो तुम्हारा अधिकार हूँ 
तुम्हारी इज़्ज़त और सम्मान हूँ 

ना बेचो मुझे भ्रष्ट नेताओं को 
गन्दी राजनीति की गलियारों में 
मेरा आदर  करोगे यदि तुम 
पाओगे तुम अपने अधिकारों को 
उस दिन सच्चे भारतीय बन जाओगे 

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