Saturday, August 15, 2015

पाँचाली मत बन

पाँचाली मत बन
 रानी झाँसी बन तू ।
यहाँ कृष्ण नहीं कोई
हर जन कंस और रावण है ।

हर चौराहे पर बैठे हैं दानव
जिनके मन में दया ना आई है ।
देह में लालच भरा है इनके
हर कोई दुर्योधन का भाई है ।

पाँचाली मत बन ________।

बाहर की तो बात ही छोड़ो
घर में भी ना सुरक्षा पाई है ।
क्या भाई क्या बाप क्या ताऊ
हर किसी ने घात लगाई है ।

पाँचाली मत बन ________।

तू ही अपनी सखा कृष्ण है
तुझे ही अपनी लाज बचानी है ।
तलवान उठा इंसाफ की तुने
हर कंस की सांस मिटानी है ।

पाँचाली मत बन ________।

काली बन जा, दुर्गा बन जा
सती नहीं अब होना है ।

उठा ले खङग तू हाथ में अपने
अब लज्जित नहीं होना है ।

पाँचाली मत बन ________ ।

जान ले अधिकार तू अपना
मत सह तू किसी के ज़ुल्मों को
अपने हाथों लिख तकदीर अपनी
रौंद दे हर रावण और कंस को ।
पाँचाली मत बन _______ ।

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