लोग !
कैसे बदल जाते हैं,
काली छाई घटा की तरह,
सुर्ख धूप और छाया की तरह,
सूनी डगर और भूचाल की तरह,
कैसे! बदल जाते हैं , लोग |
कभी अपनापन दिखाते हैं,
फिर खुद ही भूल जाते हैं,
हर पल दिल की धड़कन बनकर,
ढ़ेरों सारी खुशियाँ देकर,
जाने कब गम भी दे जाते हैं,
लोग!
कैसे बदल जाते हैं |
शुक्र है रब तू नहीं बदलता,
हर पल संग है,मेरे रहता,
सुना है, तू ही सबमें समाया है,
फिर, क्यों इतनी खुद्गर्ज़ी,
दिखा जाते हैं लोग,
कैसे , और क्यों,
बदल जाते हैं लोग |
कैसे बदल जाते हैं,
काली छाई घटा की तरह,
सुर्ख धूप और छाया की तरह,
सूनी डगर और भूचाल की तरह,
कैसे! बदल जाते हैं , लोग |
कभी अपनापन दिखाते हैं,
फिर खुद ही भूल जाते हैं,
हर पल दिल की धड़कन बनकर,
ढ़ेरों सारी खुशियाँ देकर,
जाने कब गम भी दे जाते हैं,
लोग!
कैसे बदल जाते हैं |
शुक्र है रब तू नहीं बदलता,
हर पल संग है,मेरे रहता,
सुना है, तू ही सबमें समाया है,
फिर, क्यों इतनी खुद्गर्ज़ी,
दिखा जाते हैं लोग,
कैसे , और क्यों,
बदल जाते हैं लोग |
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