कुछ कहना है तुमको जिदंगी ,
क्या सुन पाओगी तुम ?
बड़ी ही निराली हो तुम
कितने ही रंग है तुम्हारे
कभी धूप हो कभी छाँव हो ,
कभी सुबह हो कभी साँझ हो ।
कुछ कहना है तुमको जिदंगी ,
क्या सुन पाओगी तुम ?
कभी खुशियाँ भर के लाती हो ,
फिर गम भी संग दे जाती हो ।
कभी नूर तो कभी बेनूर हो ,
इतनी जल्दी क्यों बदल जाती हो तुम ?
कुछ कहना है तुमको जिदंगी ,
क्या सुन पाओगी तुम ?
मेरी ज़रा भी समझ ना आई तुम ,
हर पल नया गम लाई तुम ,
समझ ही नहीं पाई तुमको ।
प्यार करूँ या लड़ूँ मैं तुमसे ?
कुछ कहना है तुमको जिदंगी ,
क्या सुन पाओगी तुम ?
क्या सुन पाओगी तुम ?
बड़ी ही निराली हो तुम
कितने ही रंग है तुम्हारे
कभी धूप हो कभी छाँव हो ,
कभी सुबह हो कभी साँझ हो ।
कुछ कहना है तुमको जिदंगी ,
क्या सुन पाओगी तुम ?
कभी खुशियाँ भर के लाती हो ,
फिर गम भी संग दे जाती हो ।
कभी नूर तो कभी बेनूर हो ,
इतनी जल्दी क्यों बदल जाती हो तुम ?
कुछ कहना है तुमको जिदंगी ,
क्या सुन पाओगी तुम ?
मेरी ज़रा भी समझ ना आई तुम ,
हर पल नया गम लाई तुम ,
समझ ही नहीं पाई तुमको ।
प्यार करूँ या लड़ूँ मैं तुमसे ?
कुछ कहना है तुमको जिदंगी ,
क्या सुन पाओगी तुम ?
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