Tuesday, July 14, 2015

मेरा दर्द

दर्द मेरा जब ,
मेरे जीने की वजह बन गया ,
यही दिल की राहत और
यही मेरा मुकद्दर बन गया।

खुशी तो धोखा थी ,
आई और चली गई ।
कुछ सपने दिखाकर मुझको ,
जाने कब रुस्वा हो गई ।
गम ही रहा मेरे पास ,
जो हमदर्द मेरा बन गया ।

दर्द मेरा जब ,
मेरे जीने की वजह बन गया ,
यही दिल की राहत और
यही मेरा मुकद्दर बन गया।

अच्छा हुआ कोई आस नहीं ,
कोई नया विश्वास नहीं ,
कोई आएगा लेकर खुशियाँ यहाँ
उस पल का भी तो इंज़ार कहाँ ।
यह तन्हाई ही मेरा जीवन है ।
यही अब मेरा मुकद्दर बन गया ।

दर्द मेरा जब ,
मेरे जीने की वजह बन गया ,
यही दिल की राहत और
यही मेरा मुकद्दर बन गया।

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