बचपन बेला, बड़ी सुहानी
बस भोलापन, चंचलता इसमें
ना चतुरता ना कपटीपन
बस परियों की सुने कहानी
बचपन बेला, बड़ी सुहानी
ना कोई दुश्मन ना ही पराया
बस खुशियों में रहे समाया
पल में रूठे पल में मनाया
खुद भी हँसे और सब को हँसाया
बचपन बेला, बड़ी सुहानी
थक हार कर स्कूल से आना
भूख - भूख कह कर चिल्लाना
स्कूल की सारी कथा सुनाना
भाई बहन से फिर भिड़ जाना
बचपन बेला, बड़ी सुहानी
हर चीज़ के लिए ज़िद मचाना
रो - रो कर घर सिर पर उठाना
माँ की शिकायत पापा जी से लगाना
पापा के बातें जा माँ को बताना
बचपन बेला, बड़ी सुहानी
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